अपनी असीम शक्तियों को पहचानों
अपनी असीम शक्तियों को पहचानों पहले मुर्गी आई थी या अंडा? जितना कठिन यह प्रश्न है उतना ही कठिन यह जानना है कि हमारी शक्ति क्या है और हमारी कमज़ोरी क्या है। यह जानना तो और भी कठिन है कि हम कर क्या सकते हैं और हमें करना क्या चाहिए। यदि जीवन में हम कुछ बड़ा नहीं सोचेंगे तो हम न तो जीवन की चुनौतियाँ स्वीकार कर पाएँगे और न ही अपनी कमियों को पहचान पाएँगे। यह निर्णय लेना कोई आसान काम नहीं है कि हम जीवन में कर क्या सकते हैं अथवा करना क्या चाहते हैं। क्योंकि यह बात केवल निर्णय लेने की नहीं है बल्कि यह तो एक लम्बी प्रक्रिया है जिसमें समय लगता है जिसके लिए बड़े धैर्य और सहनशक्ति की ज़रूरत होती है । मनुष्य की शक्तियों के बारे में तो कई महापुरुषों ने भी हमारा मार्ग-दर्शन किया है। इस बारे में स्वामी विवेकानंद जी ने क्या कहा है? स्वामी विवेकानंद की शरण में एक युवक एक बार की बात है एक युवक बहुत परेशान था। कठिन परिश्रम करने के पश्चात् भी वह दो जून की रोटी नहीं जुटा पाता था।...